
पचपेड़ी में कानून को ठेंगा, अवैध ईंट भट्टों का धंधा जारी, प्रशासन बेखबर
बिलासपुर/पचपेड़ी। सरकार की सख्ती के बावजूद पचपेड़ी तहसील में अवैध ईंट भट्टों का साम्राज्य बेरोकटोक चल रहा है। हैरानी की बात ये है कि मीडिया कई बार इस काले कारोबार की पोल खोल चुका है, फिर भी जिम्मेदार अफसरों की नींद नहीं टूट रही। सवाल उठता है— बार-बार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा क्यों?
कागज पर नियम, जमीन पर खेल
जोनधरा, भिलौनी और मचाहा में चल रहे ये भट्टे बिना पर्यावरण विभाग की NOC और खनिज विभाग की मंजूरी के धुआं उगल रहे हैं। सरकारी खजाने को रॉयल्टी का एक रुपया नहीं, लेकिन मिट्टी का अवैध खनन दिन-दहाड़े जारी है। चिमनियों से निकलता जहरीला धुआं लोगों का दम घोंट रहा है— सांस की तकलीफ, आंखों में जलन अब यहां के ग्रामीणों की रोज की कहानी बन गई है। हद तो तब हो गई जब नदी के किनारों को काटकर ईंटें बनाई जाने लगीं, जिससे बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है।
अफसर मौन, जनता में रोष
इलाके में चर्चा गर्म है— क्या इन अवैध भट्ठा मालिकों को विभाग का ‘अदृश्य आशीर्वाद’ मिला हुआ है? हर बार खबर छपने पर अधिकारी ‘जांच कर कार्रवाई करेंगे’ का पुराना राग अलाप देते हैं, लेकिन मौके पर कुछ नहीं बदलता। हालात जस के तस हैं।
किस बड़े हादसे का इंतजार?
स्थानीय लोग पूछ रहे हैं— क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? अवैध खनन से सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, पर्यावरण तबाह हो रहा है, फिर भी खनिज और राजस्व विभाग की टीम खामोश क्यों बैठी है?
अब परेशान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से सीधी दखल की मांग की है। उनकी मांग साफ है— इन अवैध भट्टों पर तुरंत ताला लगे, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और पर्यावरण को और बर्बाद होने से बचाया जाए।



